State Policy Director Elements

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राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत

 

State Policy Director Elements

 

State Policy Director Elements: जहां एक तरफ भारतीयों के पास मौलिक अधिकारों का लाभ है उसी प्रकार राज्य सरकारों पर राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को निभाने का दायित्व  है। राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का उद्देश्य राज्य को जनता के हित में कार्य करने के लिए निर्देश देना है। नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुसार राज्य को इस प्रकार कार्य करना होगा की सभी नागरिकों को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।  किसी भी प्रकार से बच्चों और स्त्रियों का अपमान ना हो उन्हें खरीदा और बेचा ना जा सके। राज्य काम पानी शिक्षा पाने तथा अधिकारी बुढ़ापा और अंग हीनता की दशाओं में सार्वजनिक सहायता प्राप्त करने के अधिकार का प्रावधान करेगा। राज्य और कानून तथा आर्थिक संगठनों द्वारा ऐसी स्थिति पैदा की जाएगी जिसे किसान और मजदूर निर्वाह योग्य मजदूरी प्राप्त कर सकें इसी के साथ आवश्यक अवकाश प्राप्त कर सकें।

 

नीति निदेशक सिद्धांतों के गांधीवादी सिद्धांत

 

नीति निदेशक तत्वों पर गांधीवादी विचारधारा का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने के लिए मिलता है इसके अनुसार राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करेगा और इस प्रकार की शक्तियां उपलब्ध कराएगा जिससे कि पंचायतों द्वारा स्वायत्त शासन की इकाई के रूप में काम करना आसान हो सके।  इसी प्रकार राज्य कुटीर उद्योगों को बढ़ाने का प्रयास करेगा। दूध देने वाली नस्लों को सुधारने का प्रयास राज्य करेगा और इसी के साथ मादक वस्तुओं का प्रयोग सिर्फ चिकित्सा के उपयोग तक ही सीमित रखने का प्रयास करेगा

 

बौद्धिक उदारवादी सिद्धांत

 

बौद्धिक उदारवादी सिद्धांत में सबसे  महत्वपूर्ण 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए   फ्री में प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। सभी राज्य क्षेत्रों में समान सिविल संहिता लागू करने की कोशिश की जाएगी।  भौतिक उदारवादी सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण बिंदु राष्ट्रों के बीच न्याय पूर्ण संबंधों को सम्मान पूर्वक बनाए रखने का भी उत्तर दायित्व है।  राज्य को चाहिए की अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों के प्रति संगठित लोगों में आधार का भाव बढ़ाए। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय विवादों को मध्यस्था द्वारा निपटाने के प्रयास के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए।

 

क्योंकि नीति निदेशक सिद्धांत जनमानस के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्मित की गई यही कारण है यह संविधान का अंतरंग अंग है। बहुत बार न्यायपालिका ओं ने संविधान की व्याख्या करते समय नीति निदेशक तत्व को ध्यान में रखा है और न्यायपालिका ने राष्ट्र की इच्छा का प्रतीक माना है

 

मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व

 

मौलिक अधिकार व्यक्ति को सम्मान और गौरव में जीवन प्रदान करने के लिए निर्मित किए गए। मौलिक अधिकारों के बिना लोकतंत्र की कल्पना थोड़ी मुश्किल है परंतु नीति निदेशक सिद्धांत एक  आर्थिक , सामाजिक और कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए बनाए गए हैं। इसके अलावा मौलिक अधिकार नकारात्मक व सकारात्मक दोनों स्वरूप में है जबकि नीति निदेशक सिद्धांत मात्र सकारात्मक ही होते हैं।  इसके अलावा मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए अथवा प्राप्त करने के लिए न्यायालय जा सकते हैं परंतु नीति निदेशक सिद्धांत न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते नीति निदेशक तत्व योग्य नहीं है।  मौलिक अधिकारों पर कुछ प्रतिबंध भी है परंतु राज्य के नीति निदेशक तत्वों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। राज्य के नीति निदेशक तत्व राज्य को अपनी इच्छा से लोगों के हित और कल्याण के लिए मानने होते हैं।

 

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