rajya punargathan ayog राज्य पुनर्गठन आयोग

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राज्य पुनर्गठन आयोग

rajya punargathan ayog राज्य पुनर्गठन आयोग

भारत 1947 में मैं 15 अगस्त को आजाद हुआ लेकिन भारत की आजादी से पहले ही भारत में राज्यों के पुनर्गठन की मांग जोर पकड़ने लगी थी यही कारण है कि इस मांग को बढ़ता देख संविधान सभा ने सभा ने नवंबर 1947 में एस के धर आयोग का गठन किया इस आयोग का काम राज्य के पुनर्गठन पर जो की भाषा के आधार पर होंगे अपनी सिफारिशें देना था दर आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया 3 सदस्यों वाली कमेटी 1948 में गठित की गई जिसमें 3 सदस्य जवाहरलाल नेहरू बल्लभ भाई पटेल और भाई पटेल और पट्टा भी सीतारमैया शामिल थे और इस समिति को जेबीपी समिति के नाम से जाना गया एस के धर समिति के द्वारा यह सुझाव दिया गया कि राज्यों का पुनर्गठन राष्ट्र की उन्नति और आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए ना की भाषाओं के आधार पर इस प्रकार एस के धर समिति ने भाषा के आधार भाषा के आधार समिति ने भाषा के आधार भाषा के आधार धर समिति ने भाषा के आधार भाषा के आधार समिति ने भाषा के आधार भाषा के आधार भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की बात को स्वीकार नहीं किया समिति की सिफारिशें कांग्रेस कार्य समिति द्वारा समिति द्वारा 1949 में स्वीकार कर ली गई समिति की सिफारिशों को स्वीकार स्वीकार होने के बाद भी लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा था विशेषकर तेलुगू भाषी क्षेत्रों में भाषा के आधार पर राज्य विनर गठित करने की मांग लगातार बढ़ रही थी और तेलुगु भाषी क्षेत्रों का यह आंदोलन बहुत तेजी के साथ एक हिंसक रूप ले रहा था और देखते ही देखते यह आंदोलन इतने हिंसक हो गए की 18 से 53 में तेलुगू भाषी क्षेत्रों में कांग्रेस को भाषा के आधार पर पुनर्गठन स्वीकार करना पड़ा इसी कारण देश के भाषाई आधार पर पर गठित गठित पहले राज्य का उदय हुआ जिसका नाम आंध्र प्रदेश था और यह राज्य 1953 में में राज्य 1953 में में बनाया गया समस्याएं इतनी बढ़ गई थी कि इसके निवारण के लिए सजल अली की की अध्यक्षता में 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया आयोग की सिफारिशें 1955 में एक रिपोर्ट के रूप में केंद्र को सौंपी गई जिसमें भाषा और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें पेश की गई आयोग की जो सिफारिशें थी उन्हें और ज्यादा प्रभाव कारी कारी जो सिफारिशें थी उन्हें और ज्यादा प्रभाव कारी कारी और ज्यादा प्रभाव कारी बनाने के लिए संसद ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पास कर दिया दिया और पूर्णतया लागू किया परिणाम स्वरूप 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेशों केंद्र शासित प्रदेशों का निर्माण हुआ हमें ध्यान रखना चाहिए कि कि भाषा के आधार पर भारत में सबसे पहला पुनर्गठन 1912 में बिहार उड़ीसा और असम को गठित करके किया गया था इसी प्रकार भारत में भाषा के आधार पर राज्य पुनर्गठन की मांग की शुरुआत हुई और अंततः सरकार के इस मांग को ठुकरा ने के बाद के बाद लोगों की भावना हिंसक आंदोलन में परिवर्तित हुई तदुपरांत लोगों की मांगों को मारना सरकार की मजबूरी बन गई और आज भी भारत में कहीं ना कहीं भाषाई आधार पर राज्य पुनर्गठन की मांग उठती रहती है जिससे निपटने का हमारी सरकार भरसक प्रयास करती है निपटने का हमारी सरकार भरसक प्रयास करती है

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