Fundamental duties in hindi

No comments exist

मौलिक कर्तव्य 

Fundamental duties in hindi

Fundamental duties in hindi हम पहले मौलिक अधिकारों के बारे में पढ़ चुके हैं। लेकिन, अधिकार और कर्तव्य में अंतर है यह माना जा सकता है कि मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।   मतलब मौलिक अधिकार व्यक्ति को स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। परंतु, मौलिक कर्तव्य व्यक्ति को याद दिलाते हैं की वह व्यक्ति अपने राष्ट्र का अथवा राज्य का ऋणी है। इसी प्रकार मौलिक कर्तव्य व्यक्ति को यह बताते हैं, कि उसे देश के लिए और उसकी पवित्रता के लिए सेवा करने को सदैव तैयार रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को राष्ट्र राज्य की सेवा और कानूनों और नियमों का निर्वाह पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए।

 

प्रगति की जिम्मेदारी और राष्ट्र को विकास की ओर अग्रसर बनाने का कार्य

Fundamental duties in hindi जिस तरह राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत राज्यों को संबोधित करते हैं, इसी प्रकार मौलिक कर्तव्य नागरिकों को संबोधित करते हैं। राज्य नागरिकों से अपेक्षा करता है कि राष्ट्र राज्य की प्रगति में वह सभी बराबर के सहभागी हैं। मात्र मूकदर्शक नहीं, यदि हमने यह सोच लिया की प्रगति की जिम्मेदारी और राष्ट्र को विकास की ओर अग्रसर बनाने का कार्य मात्र सरकार और न्यायपालिका का है तो राष्ट्र राज्य में विकास की संभावना है ना के बराबर हो जाती हैं जबकि व्यक्ति को स्वयं बराबर की हिस्सेदारी के साथ राज्यों को और साथ में स्वयं को प्रगतिशील बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।

 

हमें याद रखना चाहिए

हमें याद रखना चाहिए, कि मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 51 क  भाग 4 क के अंदर स्थापित किया गया। उस समय सिर्फ 10 मौलिक कर्तव्य संविधान में जोड़े गए थे। जबकि, 11 कर्तव्य 86 वें संविधान संशोधन 2002 के द्वारा जोड़ा गया।

 

यह 11 मौलिक कर्तव्य किस प्रकार है

  1. भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वे संविधान का पालन करें। उसके आदर्शों संस्थाओं राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
  2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजो रखे। और, उनका पालन करें
  3. भारत की प्रभुसत्ता एकता और अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम पवित्र कर्तव्य है।
  4. देश की रक्षा करें जब कभी राष्ट्र की सेवा का आह्वान हो तो राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर रहें।
  5. भारत में धार्मिक, भाषाई, प्रादेशिक और  वर्गीय विभिन्नता मौजूद है। इसलिए समुदायों के बीच सामंजस्य और भाईचारा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। नागरिकों का यह कर्तव्य है कि उनका बहिष्कार करें, जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध है।
  6. हमारी समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उनका प्रशिक्षण करें।
  7. प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील ,नदी और अन्य जी भी हैं। उनकी रक्षा और उनका संवर्धन करें। तथा , प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा मानव विभाग और अन्वेषण सुधार की भावना का विकास करें।
  9. सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें और हिंसा से दूर  रहे।
  10.  व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों से सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट और बढ़ने का सतत प्रयास करें। जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रगति और उपलब्धि नवीन ऊंचाइयों को छू सके।
  11. अभिभावकों का यह कर्तव्य होगा। कि मैं अपने 6 वर्ष से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करें।

 

11 मौलिक कर्तव्य शादी में संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया। परंतु, बहुत से विद्वानों ने मौलिक कर्तव्यों की आलोचना भी की है। कुछ विद्वानों का कहना है कि मौलिक कर्तव्य की आवश्यकता संविधान में नहीं थी, परंतु जो भी हो मौलिक कर्तव्य नागरिक को उसकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाते हैं। और व्यक्ति को एक अग्रसर समाज की तरफ बढ़ने के लिए उकसाने का कार्य करते हैं।

Read Also

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *