Indus valley Civilization

Indus valley Civilization

सिंधु घाटी सभ्यता

Indus valley Civilization : सिंधु घाटी सभ्यता एक ऐसी सभ्यता है जो भारत की प्राचीनतम सभ्यता है । यही कारण है कि Indus valley Civilization का अपना ऐतिहासिक महत्व है। अगर इतिहास के बारे में चर्चा की जाए तो इतिहास का प्रारंभिक दौर सिंधु सभ्यता ही है।  जो सिंधु सभ्यता बहुत आसान विषय है लेकिन आज तक विद्यार्थी इस विषय को पढ़ते समय कहीं ना कहीं हमेशा अटक जाते हैं।  जब  लोथल, कालीबंगा, हड़प्पा और धोलावीरा जैसे नाम सुनते हैं तो हमें यह नाम समझ में तो आते हैं लेकिन कहीं ना कहीं हम उनको एक दूसरे से जोड़ने में असमर्थ हो जाते हैं।  यही वो कमी है जिसके कारण सिंधु सभ्यता के प्रारंभ और अंत तक की पूरी कहानी आज तक बहुत से विद्यार्थी नहीं समझ पाए। इसी कारण इस लेख में हम इस विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे।

सिंधु घाटी सभ्यता का प्रारंभ

Indus valley Civilization : असल में सिंधु घाटी सभ्यता भारत की सबसे पुरानी सभ्यता है। पहले विद्वानों में इसके समय को लेकर बहुत मतभेद हुए।  विद्वानों ने अलग-अलग तरह के अंदाज लगाएं, किसी का मानना था कि सिंधु सभ्यता 3300 साल पुरानी है तो कोई कहता था 30 सिंधु सभ्यता का काल 2500 ईसा पूर्व से शुरू हुआ।  लेकिन वास्तविकता कुछ और थी और भविष्य में  कार्बन 14 (C-14)  नाम की तकनीक का विकास होने के बाद मालूम हुआ कि वास्तव में Indus valley Civilization का समय जो था वे 2350  ईसा पूर्व से लेकर 1750 ईसा पूर्व था। इस समय में सिंधु घाटी सभ्यता का विकास हुआ उदय हुआ और पतन हो गया।  भारत की सभ्यता के इतने पुराने होने के कारण हर एक चीज के पूरे और पक्के सबूत नहीं मिलते।  इस सभ्यता जो कहानी है वह ज्यादातर कल्पना पर आधारित है। सीधा-सीधा मतलब यह हुआ कि अगर पुरातत्व विभाग को कोई चीज खुदाई में या किसी अन्य जगह से प्राप्त हुई और वह ऐसी लगती है जैसे उसका संबंध प्राचीन काल से हो।  तो, सबसे पहले उसके समय के बारे में पता लगाया जाता है कि वह कितने की है। इस बात का पता चलते ही उस वस्तु को उस समय की चीजों में ऐड कर दिया जाता है। और उसके बाद कल्पना की जाती है की वस्तु किस प्रकार प्रयोग की जाती होगी, और किस वर्ग के द्वारा प्रयोग की जाती होगी।  इसी प्रकार Indus valley Civilization में प्राप्त चीजें मात्र कल्पना पर आधारित है। इससे हम यह जान सकते हैं की किसी सभ्यता की सामाजिक स्थिति कैसी होगी। वहां प्रयोग होने वाली चीजें उस सभ्यता कि सांस्कृतिक स्थिति को दर्शाती है

यदि प्रारंभ की बात करें सिंधु सभ्यता का उदय  2350 ईसा पूर्व में हुआ। और इतनी पुरानी सभ्यता होने के बाद भी Indus valley Civilization में बहुत सारे आधुनिक गुण है एक प्रकार से इस सभ्यता आधुनिकता को अपने अंदर  सजोई हुए हैं। इस सभ्यता में प्राप्त हुई चीजों से जानकारी मिलती है कि यह पूरी तरह से एक शहरी सभ्यता थी।

 

हड़प्पा सभ्यता की खोज कैसे हुई

Indus valley Civilization : शुरुआत में अंग्रेज यह मानते थे कि भारतीय इतिहास सिकंदर के आक्रमण से ही शुरू होता है, और इस चीज पर गर्वित होते थे उनकी सभ्यता भारतीय सभ्यता से पुरानी सभ्यता है और भारतीय  लोगों को वह  असभ्य मानते थे। परंतु  ब्रिटिश अधिकारियों को बहुत आश्चर्य हुआ जब भारत में रेलवे लाइन बिछाने के दौरान   ईट की कमी पड़ गई,और इन ईटों की आपूर्ति के लिए इन खंडहरों में खुदाई शुरू कराई । लेकिन यहां से प्राप्त  सामग्रियां देखकर मजदूर आश्चर्यचकित रह गए और उन्होंने अधिकारियों को सूचित किया।  इस तरह 1921 में दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा सभ्यता के पहले खंडहर का विश्लेषण शुरू कराया गया । उस समय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अध्यक्ष जॉन मार्शल थे जिन के निर्देशन में यह कार्य हुआ।  इस प्रकार हम पता चला कि भारत का इतिहास कितना पुराना है।

 

नगर योजना

यूं तो Indus valley Civilization की खोज ने पूरे भारत को गौरवान्वित किया था।  परंतु अभी बहुत सी चीजें थी जो इस सभ्यता में चार चांद लगा देने को तैयार थी।  इनमें सबसे पहले नगर योजना थी। हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना ने यह सिद्ध किया की 2350 ईसा पूर्व में भी भारतीय इतने सभ्य थे की उन्होंने एक बेहतरीन नगर योजना का निर्माण किया था।  यह सत्य है कि भारत में मौजूद हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना विशेष अतुल्य थी।  और यह सिंधु घाटी सभ्यता की ऐसी विशेषता थी जिसने सबसे पहले पुरातत्व विभाग का ध्यान अपनी तरफ खींचा। Indus valley Civilization की नगर योजना में बहुत सारी विशेषताएं हैं जिनमें एक विशेषता जल निकास प्रणाली है।  नगर की जल निकासी प्रणाली को सुनियोजित ढंग से बनाया गया।  घरों से छोटी नालियों के द्वारा पानी गलियों में गलियों से नालियों के द्वारा पानी सड़कों के किनारे पर बने हुए नालों में प्रवेश करता था और उन नालों  के द्वारा जाकर सीधे नदी में गिरता था।  हड़प्पा सभ्यता में नालियां हमेशा ढकी हुई रहती थी और पूरी तरह से साथ रहती थी।  हम अंदाजा लगा सकते हैं कि आज के समय में भी सभी नालियां पूरी तरह से ढकी नहीं रहती, तो भारत की सभ्यता में स्वच्छता का स्तर कितना ऊंचा होगा।

नालियों के अलावा नगर योजना में सड़क निर्माण की एक और विशेषता शामिल थी।  सड़कों का निर्माण कैसे किया गया था कि वह एक दूसरे को बिल्कुल समकोण पर काटती है।  और सड़कें साफ और चौड़ी होती थी। इस प्रकार से सड़कों का निर्माण यह दर्शाता है कि हड़प्पा वासी सुनियोजित नगर योजना से वाकिफ थे।  Indus valley Civilization में हर नगर दो हिस्सों में बटा हुआ था पहला हिसाब पश्चिमी टीला और दूसरा हिस्सा पूर्वी टीला था। इस प्रकार जो पश्चिमी टीले होते थे वह पूर्वी टीले की अपेक्षाकृत छोटे और ऊंचे होते थे।  इन पर दुर्ग स्थापित किए जाते थे। नगरों में जिस प्रकार के साक्ष्य मिले हैं उनसे यह साबित होता है कि इन नगरों में आम लोग जैसे शिल्पकार और व्यापारी व सामान्य नागरिक रहते होंगे।

नगर में बने हुए घरों में विशेष बात यह है घरों कि जो खिड़कियां होती थी वह मेन सड़क की तरफ ना खुलकर गलियों की तरफ खुलती थी। इसी प्रकार दरवाजे भी गलियों की तरफ खोले जाते थे। लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता का एक शहर लोथल इस संदर्भ में अपवाद है क्योंकि इस शहर में उपस्थित सभी घरों के खिड़की और दरवाजे मुख्य सड़क की और खुलते थे।

सिंधु वासी मकान बनाने के लिए ईटों का प्रयोग करते थे, इस बात से यह पता चलता है कि उनको ईट बनाने आती थी। इसके अलावा सड़कों के दोनों तरफ नालियों के निर्माण के लिए भी सेंधव सभ्यता में ईंटों का प्रयोग किया गया था। बड़े-बड़े भवन है

राजनीतिक स्थिति

Indus valley Civilization के समय लोगों ने सबसे ज्यादा वाणिज्य और व्यापार की तरफ अपना ध्यान दिया।  इतिहासकारों का मत है कि उस समय शासन जनप्रतिनिधित्व द्वारा होता था। आर्थिक स्थिति से और प्राप्त साक्ष्य के अनुसार हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की राजधानियां होने का अनुमान लगाया गया है।

सामाजिक स्थिति

Indus valley Civilization समाज मातृसत्तात्मक समाज था।  यह लोग पुरोहित, व्यापारी, श्रमिक, अधिकारी, जुलाहे, और शिल्पकार के रूप में रहते थे।  यहां के निवासी शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे। अमीर और गरीब लोगों के आभूषण की अलग अलग होते थे जैसे अमीर लोग सोने चांदी और हाथी दांत के बने आभूषण पहनते थे इसके विपरीत गरीब लोग शंख ,     सीप और मिट्टी के बने आभूषण पहनते थे। महिलाएं और पुरुष दोनों ही आभूषण का प्रयोग करते थे। हड़प्पा से R-37 कब्रिस्तान मिला है।

आर्थिक स्थिति

Indus valley Civilization के लोगों में वाणिज्य व्यापार का बड़ा महत्त्व था। यह लोग बहुत से जानवर पालते थे जिनमें गाय, भेड़, बकरी, कुत्ते और खच्चर इत्यादि शामिल थे। इनका सबसे प्रिय पशु कूबड़ वाला सांड था। कालीबंगा से ऊंट की अस्थियां प्राप्त हुई है, घोड़े की अस्थियां भी प्राप्त हुई है परंतु घोड़े को पालने का साक्ष्य नहीं मिला है।  यह लोग तरबूज अनार नारियल नींबू जैसे फलों से भी परिचित थे। Indus valley Civilization कृषि करते थे और इनकी मुख्य फसलें गेहूं, जो, राई, तिल, सरसों, मटर, चावल और कपास थी। इन कपास की खोज करने का श्रेय सिंधु वासियों को जाता है। व्यापार विनिमय प्रणाली पर आधारित था। यह लोग समुंद्र के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी करते थे। सभ्यता के लोग तांबा में टिन मिलाकर कांसा नाम की धातु बनाते थे। परंतु इन लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था।  छोटी मूर्तियां बनाने के लिए मोम के सांचे का इस्तेमाल किया जाता था। दिलमून सिंधु सभ्यता और मेसोपोटामिया के बीच मध्यस्थ बंदरगाह था। सिंधु सभ्यता में सबसे प्रसिद्ध कलाकृति मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई है यह कलाकृति नृत्य की मुद्रा में नग्न स्त्री की कांस्य की प्रतिमा है। सिंधु बासी कंघे का प्रयोग करते थे। इसके अलावा मेकअप करने के लिए सौंदर्य सामग्री का प्रयोग करते थे जिसमें होठों को लाल करने के लिए लिपस्टिक का प्रयोग होता था। तोल के लिए 16 के आवर्तकओं का प्रयोग होता था। जैसे,16, 64, 160, 320 इत्यादि।  सिंधु के लोगों को मापन पद्धति का ज्ञान था। खुदाई में इस प्रकार के डंडे मिले हैं जिन पर माप के निशान बने हुए थे।

धार्मिक स्थिति

Indus valley Civilization से बड़ी मात्रा में ताबीज की प्राप्ति यह दर्शाती है, कि वे लोग अदृश्य शक्ति या अंधविश्वासों में विश्वास रखते हैं।  वे लोग पुनर्जन्म में विश्वास रखते थे। इस सभ्यता के लोग भूत-प्रेत में विश्वास रखते थे। वह पशु, वृक्ष और मानव के रूप में ईश्वर की उपासना करते थे। यह लोग पशुपति की उपासना करते थे। इसके अलावा जल पूजा, योनि पूजा, लिंग पूजा, नाग पूजा, वृक्ष पूजा, और अग्नि पूजा का प्रचलन था।

पतन और उसके कारण

Indus valley Civilization का समापन ना होकर पतन हुआ। इसका मतलब सिंधु सभ्यता धीरे-धीरे समाप्त हुई। कुछ विद्वानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जैसे भूकंप, बाढ़, व  तूफान की वजह से इस सभ्यता का पतन हो गया। परंतु कुछ विद्वान मानते हैं कि आर्यों का आक्रमण के कारण इस सभ्यता का पतन हुआ। इसी प्रकार के बहुत सारे प्रश्नों का जवाब मिलना तब तक मुमकिन नहीं जब तक हड़प्पा वासियों की लिपि को पढ़ा ना जा सके।

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