Gram Panchayat

Gram Panchayat

Gram Panchayat – पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन द्वारा प्राप्त हुआ है I इस संशोधन द्वारा ग्राम पंचायत को तीन भागों में बांट दिया गयाI जिसमें,

  1. ग्राम पंचायत
  2. पंचायत समिति
  3. और जिला परिषद उपस्थित हैI

 

Gram Panchayat – ग्राम पंचायत एक ऐसी इकाई है जो पंचायती राज में सबसे छोटी इकाई मानी जाती हैI  यदि बात करें ग्राम सभा के सदस्यों की तो ग्राम का प्रत्येक व्यक्ति, ग्राम सभा का सदस्य माना जाता हैI परंतु यह आवश्यक है कि उसने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो, और वह नाबालिक, पागल अथवा न्यायालय द्वारा ग्राम  सभा का सदस्य बनने के अयोग्य ना ठहराया गया होI ग्राम पंचायत का शासन ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा चलाया जाता हैI ग्राम सभा के सदस्य ग्राम का हर वह व्यक्ति है जिसमें 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली हैI

 

Gram Panchayat

हर व्यक्ति जो विधान मंडल का सदस्य बनने के योग्य है, वह ग्राम पंचायत  का सदस्य बनने योग्य होगाI परंतु विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होना अनिवार्य हैI लेकिन ग्राम पंचायत का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष हैI  ग्राम पंचायत के प्रशासन में माह में एक बार बैठक अवश्य होती है, और बैठक में जो भी निर्णय लिए जाते हैं, बहुमत के आधार पर होते हैंI यदि ऐसी स्थिति आती है की किसी विषय के लिए  बराबर निर्णय आते हैं उस स्थिति में सरपंच को निर्णायक मत देने का अधिकार हैI ग्राम पंचायत की अध्यक्षता सरपंच द्वारा ही की जाती हैI

 

ग्राम पंचायत का कार्यकाल

 

Gram Panchayat – ग्राम पंचायत का कार्यकाल हर एक राज्य में अलग-अलग थाI परंतु, 73वें संविधान संशोधन के द्वारा निश्चित कार्यकाल रखा गया हैI जो इस प्रकार हैI

  1. पंचायत अपने प्रथम अधिवेशन से 5 वर्षों तक के कार्यकाल के लिए चुनी जाएगीI और प्रत्येक राज्य में इसी प्रकार 5 वर्षों की निश्चित अवधि तक कार्य करेगीI
  2. 5 वर्ष की अवधि पूरी करने से पहले निर्वाचन करवाने अनिवार्य हैI
  3. विधि के द्वारा इन पंचायतों को 5 वर्ष की अवधि से पहले विघटित किया जा सकता हैI
  4. पंचायतों का यदि विघटन किया गया है तो विघटन की तारीख से 6 माह के अंदर निर्वाचन हो जाना आवश्यक हैI

 

ग्राम पंचायत के कार्य में दो प्रकार के कार्य आते हैंI

  1.  इच्छा अनुसार किए गए कार्य –   इच्छा अनुसार किए गए कार्य में साधारण कार्य याद हैI जैसे कि, सड़क के दोनों तरफ पेड़ लगवाना, अकाल या बाढ़ के समय ग्राम वासियों की मदद करना,  ग्राम वासियों के मनोरंजन के लिए पंचायत घरों में रेडियो और टेलीविजन का प्रबंध करना और पुस्तकालय की स्थापना करना इत्यादिI
  2. विकासात्मक कार्य –  इंकार अनुसार भूमि सुधार कानून को लागू करना,  कुटीर उद्योगों का विकास करना, तकनीकी तथा व्यवसायिक शिक्षा की सुविधाएं   जुटाना सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर बनाने में सरकार की सहायता करनाI

 

ग्राम पंचायत के आय के स्रोत हैI जैसे कि मकान और जमीन पर कर के द्वारा ग्राम पंचायत की आय होती हैI इसके अलावा माल और बिक्री पर भी कर लगता हैI गांवों में मौजूद समुदायिक केंद्र आदि और सार्वजनिक उपयोग के भवनों से आने वाला किराया ग्राम पंचायत के हिस्से में जाता हैI इसके अलावा राज्य में जहां-जहां न्याय पंचायत की स्थापना का प्रावधान है,  वहां पर न्याय पंचायत द्वारा किए गए जुर्माने भी ग्राम पंचायत की आय का स्त्रोत हैI

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