Fundamental Rights Molik Adhikar

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मौलिक अधिकार

Fundamental Rights Molik Adhikar

मौलिक अधिकार भारत के नागरिक अधिकार है जिनके बिना व्यक्ति का बहुमुखी विकास  असंभव है यही कारण है मानव अधिकारों में मौलिक अधिकारों को सबसे ऊपर का दर्जा प्राप्त है परंतु मौलिक अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए है लेकिन कुछ मौलिक अधिकार जो गौरवपूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक है विदेशी लोगों को भी प्राप्त है चर्चा करते हैं इस विषय पर

 

मौलिक अधिकार कितने हैं

1979 से पहले की बात करें भारत में सात मौलिक अधिकार है  लेकिन भारत में बढ़ते भ्रष्टाचार भूमि माफिया को मद्देनज़र रखते हुए घर  भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में से 20 जून 1979 को संपत्ति के अधिकार को निकाल दिया गया उस दिन के बाद से संपत्ति का अधिकार सामान्य कानून बन गया संपत्ति के अधिकार को निकालने के बाद भारतीय संविधान में मात्र छह मौलिक अधिकार बचे हैं एक भारतीय नागरिक को उसके बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक है और सहायक है

 

  1. समता अथवा समानता का अधिकार

 

समता का अधिकार ऐसा अधिकार है जो व्यक्ति को समान अवसर प्रदान कराता है इस अधिकार के अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समानता के नियम से वंचित नहीं किया जाए किसी भी व्यक्ति को जात अथवा धर्म के आधार पर का शोषण शिकार नहीं बनाया जा सकता  इसका मतलब समता का अधिकार यह साबित करता है की कोई भी व्यक्ति जो भारतीय नागरिक हो, सबको एक समान समझा जायगा। इस अनुसार किसी भी समान परिस्तिथी में पत्येक व्यक्ति के साथ समान व्यवहार होगा।

 

  1. स्वतंत्रता का अधिकार

 

 स्वतंत्रता के अधिकार के अनुसार भारत में रहने वाले भारत के नागरिक हर प्रकार से स्वतंत्र होंगे  भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार के विषय में अनुच्छेद 19 से 22 तक उल्लेख है। नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,  सभा करने की स्वतंत्रता, संघ बनाने की स्वतंत्रता, भ्रमण करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। इसी प्रकार वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में प्रेस की स्वतंत्रता, विज्ञापन की स्वतंत्रता, चल-चित्र की स्वतंत्रता भी शामिल है।स्वतंत्रता के अधिकार में व्यक्ति को अपनी मर्जी से विवाह करने की स्वतंत्रता भी प्राप्त है

 

  1. शोषण के विरुद्ध अधिकार

 

किसी व्यक्ति का शोषण किया जा रहा है  उस पर जबरदस्ती दबाव बनाकर कोई कार्य कराया जा रहा है तो वे शोषण के विरुद्ध अधिकार के तहत न्याय प्राप्त कर सकता है अनुच्छेद 23 के अनुसार मानव दुरव्यापार, बलात श्रम आदि पर प्रतिबंध लगा है ।इस नियम के अनुसार स्त्रियों बच्चों का अनैतिक व्यापार पर अंकुश लगा है और बंधुआ मजदूरी समाप्त हुई है। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता को हानि पहुंचाता है अथार्त किसी दूसरे व्यक्ति का शोषण करता है इसके तहत वे उस व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है और शोषित व्यक्ति शोषण के विरुद्ध अधिकारों के तहत न्याय प्राप्त कर सकता है। जो उस का मौलिक अधिकार है।

 

  1.  धर्म स्वतंत्रता का अधिकार

 धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता प्राप्त है धर्म बदलने अन्यथा किसी धर्म का प्रचार करने की  स्वतंत्रता प्राप्त है। इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म काम आने वाला है राज्य अथवा न्यायपालिका किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगी।  42 वें संविधान संशोधन में पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़कर इस बात को संवैधानिक रूप में और स्पष्ट कर दिया गया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है।

 

  1. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार

 

भारतीय  संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकारों में जोड़ा गया है आधार 14 वर्ष के बच्चों को स्कूलों में मुफ्त प्रारंभिक शिक्षा देना प्रत्येक राज्य सरकार का कर्तव्य है इसी के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर अलग-अलग कार्यक्रम भी चलाते हैं जिसमें बच्चों को और बड़ों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है शिक्षा का अधिकार भारतीय मौलिक अधिकारों में एक अधिकार है जो भारत में सरकार के लिए शिक्षक की महत्ता को बताता है

 

  1. संवैधानिक उपचारों का अधिकार

जिस प्रकार से संविधान निर्माताओं ने व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का ध्यान रखा उसी प्रकार मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने का प्रबंध भी संवैधानिक रूप से किया है। यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो उसका भार संविधान ने उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा है। इस अधिकार के तहत इन न्यायालय को कुछ आदेश जारी करने का अधिकार होता है

 

  1. बंदी प्रत्यक्षीकरण
  2. परमादेश
  3. प्रतिषेध
  4. अधिकार पृच्छा
  5. उत्प्रेषण लेख

इन अधिकारों का प्रयोग करके सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं जिसने इन आदेशों के माध्यम से तुरंत मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम है यह विशेष अधिकार सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय को उस स्थिति के लिए प्रदान किए गए हैं जिस स्थिति में किसी भारतीय नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो ।

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