constitutional amendments

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संविधान संशोधन

constitutional amendments : संविधान निर्माताओं को पहले से आशंका थी के बदलते हुए इस समय में भविष्य में संविधान में बदलाव करना पड़ सकता है यही कारण है कि संविधान निर्माताओं ने एक लचीले संविधान का निर्माण किया और संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया को शामिल करके अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है

संसद के विशेष बहुमत द्वारा किसी अधिनियम को बदलने अथवा न्याय अधिनियम जोड़ने को संविधान संशोधन कहा जाता है इस प्रकार के संशोधन के लिए किसी भी सदन में विशेष बहुमत होना आवश्यक है इस प्रकार विशेष बहुमत मिलने के बाद विधेयक को दूसरे सदन में भेजा जाता है यदि विधेयक दूसरे सदन से भी पारित हो जाता है तो विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है और राष्ट्रपति की अनुमति मिलते ही कोई भी विधेयक अधिनियम में परिवर्तित हो जाता है विशेष बहुमत में सदन की कुल सदस्य संख्या के 50% तथा मतदान करने वाले सदस्य के दो तिहाई से कम नहीं होनी चाहिए

संविधान संशोधन

कुछ संविधान संशोधन विशेष बहुमत तथा राज्यों के अनुमोदन से किए जाते हैं इस श्रेणी में जो संशोधन आते हैं वह संघात्मक ढांचे से संबंधित है इस प्रकार के उप बंधुओं में संशोधन करने के लिए संसद के हर सदन के दो तिहाई बहुमत तथा कम से कम 50% राज्यों के विधान मंडलों का समर्थन जरूरी है जैसे अगर हमें राष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधित निर्वाचक मंडल या चुनाव प्रक्रिया में संशोधन करना है तो उनके लिए राज्यों का अनुमोदन होना आवश्यक है इसी प्रकार सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालय के गठन और क्षेत्र अधिकार के लिए भी राज्यों की सहमति ली जाती है इस प्रकार से अन्य बहुत से मुद्दे इस श्रेणी के अंदर आते हैं

constitutional amendments भारतीय संसद को इतना ताकतवर बनाया गया है कि वह ना केवल अन्य अधिनियम में संशोधन कर सकती है बल्कि संशोधन प्रक्रिया वाले अनुच्छेद 368 को भी संशोधित कर सकती है लेकिन संविधान संशोधन विधेयक तभी पारित माना जाता है जब उस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति होती है लेकिन राष्ट्रपति किसी भी विधेयक पर अनुमति देने से इंकार नहीं कर सकता है यह उपबंध संविधान के 42 वें संशोधन में स्पष्ट किया गया है

चलिए इसी प्रकार देखते हैं कुछ महत्वपूर्ण संविधान संशोधन

Some Important constitutional amendments

1 संविधान का पहला संशोधन अधिनियम 1951 सन 1951 में हुआ इस संशोधन के अनुसार स्वतंत्रता के अधिकार पर राज्य की सुरक्षा और विदेशों से मित्रता पूर्ण संबंध सार्वजनिक व्यवस्था सदाचार के हित में या न्यायालय की अवमानना अपराध को उकसाने के संबंध में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने का अधिकार राज्य को दे दिया गया और इसी के साथ-साथ अनुच्छेद 31 क व अनुच्छेद 31 ख द्वारा संपत्ति के अधिकार पर न्यायालय के अधिकार को सीमित कर दिया गया

2 दूसरा संविधान संशोधन अधिनियम 1952 की सन 1953 को लागू हुआ इसके अनुसार अनुच्छेद 81 के उपबंध 1 B में संशोधन करके हर 7:30 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के उपबंध का समापन कर दिया गया

3 संविधान संशोधन अधिनियम 1954 के अनुसार जो कि 1955 को लागू हुआ सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची की प्रविष्टि 33 में संशोधन किया गया

4 संविधान संशोधन अधिनियम 1955 अनुच्छेद 31 और 31 क और 305 में संशोधन किया गया केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार लोक कल्याण के लिए इस संशोधन के अनुसार किसी की संपत्ति मुआवजा देकर ले सकेगी और मुआवजे का प्रश्न न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं होगा

5 संविधान संशोधन अधिनियम 1955 के अनुसार अनुच्छेद 3 में संशोधन करके यह प्रार्थना किया गया कि राज्य के क्षेत्र सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयकों को राष्ट्रपति राज्य विधान मंडलों के विचारआर्थ प्रेषित करेगा

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