Constitution of India

 

Constitution of India

भारत का संविधान

Constitution of India किसी भी देश का संविधान उसके आदेशों उद्देश्यों और मूल्यों का दर्पण होता हैI यह संविधान उस देश के नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करता हैI  देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संविधान का होना आवश्यक हैI देश का संविधान यह निश्चित करता है कि देश में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगीI संविधान से स्पष्ट होता है कि देश में सरकार का गठन किस प्रकार होगाI संविधान राज्य की विधायिका न्यायपालिका और कार्यपालिका की शक्ति निश्चित करता हैI और, यह स्पष्ट करता है कि किस परिस्थिति में कौन सी संस्था किस प्रकार की कितनी शक्ति का प्रयोग करेगीI संविधान राष्ट्र राज्य में कानून-व्यवस्था और शांति स्थापित करने के लिए बहुत आवश्यक हैI

भारत का संविधान

Constitution of India: भारतीय संविधान उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्मित किया गयाI  यह संविधान नागरिकों को उनके बहुमुखी विकास के लिए अवसर प्रदान करता है और नागरिकों के खिलाफ राज्य और केंद्र को प्राप्त शक्ति पर अंकुश लगाता हैI  उसी के साथ नागरिकों की नकारात्मक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाता है ताकि नागरिक देश की समृद्धि में भागीदारी बन सकें और उनसे किसी दूसरे नागरिक को किसी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न ना होI

 

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  1. भारत का संविधान विश्व में सबसे बड़ा लिखित संविधान हैI
  2. 1922 में गांधी जी का वक्तव्य “भारत भारतीय की इच्छा अनुसार ही होगा”  के अनुसार संविधान का निर्माण जनता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया थाI
  3. 1922 में एनी बेसेंट की पहल पर केंद्रीय विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्यों की एक संयुक्त बैठक शिमला में आयोजित की गई, इस बैठक संविधान सभा के प्रश्न पर विचार करने के लिए सम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया गयाI
  4. दिल्ली में हुए सर्वदलीय सम्मेलन के समक्ष कॉमन वेल्थ ऑफ इंडिया बिल को प्रस्तुत किया गयाI
  5. मई 1928 में मुंबई में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन में भारत के संविधान के सिद्धांत निर्धारित करने के लिए मोतीलाल नेहरू के सभापति में एक समिति गठित की गई इस समिति की रिपोर्ट को नेहरू रिपोर्ट के नाम से जाना जाता हैI
  6. जून 1934 में कांग्रेस कार्यकारिणी ने घोषणा की कि श्वेत पत्र का विकल्प यह है कि व्यस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित संविधान सभा द्वारा संविधान तैयार किया जाएI
  7. कांग्रेस ने 1936 के लखनऊ अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित कर यह घोषणा की थी कि किसी बाहरी सत्ता द्वारा थोपा गया कि संविधान भारत स्वीकार नहीं करेगाI
  8. 1940 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय संविधान सभा की मांग को पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया, परंतु यह स्वीकृति अप्रत्यक्ष शर्तों के साथ हुईI
  9. 1942 को क्रिप्स योजना को ब्रिटेन ने स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लिया,  इसी के तहत भारत में एक निर्वाचित संविधान सभा का गठन किया जाना था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत के लिए संविधान का निर्माण करेगीI
  10. 1946 के कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के द्वारा अंततः भारत के संविधान के निर्माण के लिए एक बुनियादी ढांचे का प्रारूप स्वीकार कर लिया गया, जिसे संविधान सभा का नाम दिया गयाI

 

संविधान सभा के गठन के समय संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे, जिसमें 292 प्रांतों से तथा 93 देशी रियासतों से चुने गए थे और 4 कमिश्नरी क्षेत्रों से थेI  यह सभा प्रत्येक स्थान के अनुसार तीन प्रमुख संप्रदाय मुस्लिम सिख और साधारण संप्रदाय में बांटी गईI

 

उद्देश्य के प्रस्ताव

13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान के उद्देश्यों के विषय में एक प्रस्ताव संविधान सभा में प्रस्तुत किया इस प्रस्ताव के अनुसार कुछ निम्नलिखित विशेषताएं थीI

  1. भारत एक स्वतंत्र प्रभुता संपन्न गणराज्य होगाI
  2. सरकार के सभी अंगों को शक्तियां जनता से प्राप्त होगी I
  3. भारत के सभी क्षेत्रों का मिलाकर एक संघ का निर्माण किया जाएगाI
  4. पिछले क्षेत्रों अल्पसंख्यक शोषित और कबायली क्षेत्रों  की श्रेणी के लोगों के लिए सुरक्षा का प्रबंध किया जाएगाI
  5. उद्देश्य प्रस्ताव को संविधान सभा ने 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया था, इसके अनुसार स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रस्तावना भी इन्हीं देशों पर आधारित हैI

 

संविधान सभा की समितियां

संविधान सभा के साथ साथ संविधान निर्माण के लिए कुछ समिति भी गठित की गई, समितियां निर्मित करने का उद्देश्य था कि संविधान निर्माण का कार्य और आसान बनाया जा सकेI संविधान निर्माता यह चाहते हैं कि किसी भी तरह एक ऐसा संविधान बनाया जाए जो जनसाधारण की आवश्यकताओं को पूरा करेंI  संविधान निर्माताओं के ऊपर संविधान बनाने की बड़ी जिम्मेदारी थी और इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए संविधान निर्माताओं के पास कम समय थाI कम समय में यह बड़ा काम पूरा करने के लिए समितियों का गठन किया गया, ताकि अलग-अलग समिति को अलग-अलग कार्य सौंपा जा सकेI यह समितियां प्रक्रिया समिति, कार्य समिति, वार्ता समिति, संचालन समिति और प्रारूप समिति के रूप में सामने आईI

 

अक्टूबर 1947 में संविधान सभा के सचिवालय की परामर्श शाखा ने संविधान का प्रारूप तैयार किया 15 नवंबर 1948 को प्रारूप संविधान पर अनुच्छेद विचार शुरू हुआI

  1. संविधान सभा में संविधान का प्रथम वाचन 4 नवंबर 1948 तक चलाI
  2. संविधान सभा में संविधान पर दूसरा वाचन 15 नवंबर 1948 को शुरू हुआ और 17 नवंबर 1948 तक चलाI
  3. इसके बाद इसके बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान को अंतिम रूप से पास किया गयाI और, संविधान को अंगीकार करके संविधान सभा ने यह सर्वोत्तम परलेख राष्ट्र को समर्पित कियाI
  4. संविधान के कुछ अनुच्छेद 26 नवंबर 1949 के दिन लागू कर दिए गए, बाकी का संविधान 26 जनवरी के ऐतिहासिक महत्व के कारण 26 जनवरी 1950 से लागू किया गयाI
  5. इस पूरे कार्य को करने के लिए अंतिम रूप से 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगेI जबकि, संविधान के सिर्फ प्रारूप पर 114 दिन तक चर्चा हुईI और पूरे संविधान निर्माण के कार्य पर ₹6400000 का खर्च हुआI

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